लखनऊ, 13 फरवरी 2026: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में एक बेहद दिल दहला देने वाला हादसा हुआ है। स्कूल के फेयरवेल पार्टी से लौट रहे एक 12वीं कक्षा के छात्र ने अपनी तेज रफ्तार कार से कई पैदल यात्रियों और एक ऑटो-रिक्शा को टक्कर मार दी। इस भीषण दुर्घटना में एक 6 साल के निर्दोष बच्चे की मौत हो गई, जबकि पांच अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। यह घटना कानपुर रोड के बंथरा इलाके में हनुमान मंदिर के पास गुरुवार शाम लगभग 6-7 बजे के आसपास हुई।
हादसे का पूरा विवरण
पुलिस और प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, आरोपी छात्र गौरव सिंह (21 वर्ष) नाम का युवक अपनी मारुति स्विफ्ट कार चला रहा था। वह स्कूल के फेयरवेल समारोह से लौट रहा था और कार में उसके साथ एक लड़की भी मौजूद थी। तेज गति से आती कार ने पहले एक खड़ी बाइक को टक्कर मारी, फिर सड़क किनारे खड़े लोगों और एक ऑटो-रिक्शा को जोरदार धक्का दिया। हादसा इतना भीषण था कि कार लगभग 100 मीटर तक लोगों को रौंदती हुई चली गई।
घायलों में शामिल हैं:
- दीक्षांत पटेल (6 वर्ष) – जो इलाज के दौरान दम तोड़ गया
- अरमान (12 वर्ष)
- अवध बिहारी (42 वर्ष)
- साधना वर्मा (35 वर्ष)
- मीना देवी (60 वर्ष)
छोटे दीक्षांत को सबसे गंभीर चोटें आईं। उसे तुरंत सरोजिनी नगर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहां से बेहतर इलाज के लिए रेफर किया गया, लेकिन डॉक्टर उसकी जान नहीं बचा सके। अन्य घायलों का इलाज विभिन्न अस्पतालों में चल रहा है और कुछ की हालत नाजुक बताई जा रही है।
आरोपी छात्र की गिरफ्तारी और जांच
हादसे के तुरंत बाद छात्र फरार हो गया था, लेकिन सीसीटीवी फुटेज की मदद से पुलिस ने उसे जल्द ही गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने कार जब्त कर ली है और जांच जारी है। प्रारंभिक जांच में पता चला है कि छात्र बालिग है और वह बिना उचित सावधानी के तेज रफ्तार में गाड़ी चला रहा था। घटनास्थल पर मौजूद सीसीटीवी कैमरों में तेज रफ्तार कार का कहर साफ दिखाई दे रहा है, जो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।
परिवारों का दर्द और सवाल
इस हादसे ने कई परिवारों को सूना कर दिया है। दीक्षांत की मां साधना पटेल का रो-रोकर बुरा हाल है। एक मासूम बच्चा जो शाम को खेलते-कूदते घर लौट रहा था, अचानक इस दर्दनाक हादसे का शिकार बन गया। परिवार वाले पूछ रहे हैं कि आखिर स्कूल फेयरवेल जैसा जश्न इतना महंगा क्यों पड़ गया? क्या माता-पिता को अपने बच्चों को बिना लाइसेंस और ट्रेनिंग के गाड़ी सौंपने से पहले सोचना चाहिए?
यह घटना एक बार फिर सड़क सुरक्षा, किशोरों द्वारा वाहन चलाने और तेज रफ्तार के खतरों पर सवाल खड़े करती है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे हादसों को रोकने के लिए सख्त कानून, जागरूकता अभियान और अभिभावकों की जिम्मेदारी जरूरी है।
सड़क सुरक्षा की जरूरत
उत्तर प्रदेश में हर साल हजारों सड़क हादसे होते हैं, जिनमें तेज रफ्तार, लापरवाही और नाबालिग/अनट्रेंड ड्राइविंग मुख्य कारण होते हैं। इस घटना से सबक लेते हुए प्रशासन को सख्त कदम उठाने चाहिए, जैसे:
- स्कूलों के आसपास सख्त ट्रैफिक नियम लागू करना
- किशोरों को ड्राइविंग लाइसेंस जारी करने से पहले ट्रेनिंग अनिवार्य करना
- सीसीटीवी और स्पीड कैमरों का विस्तार
यह दर्दनाक हादसा सिर्फ एक परिवार की त्रासदी नहीं, बल्कि पूरे समाज के लिए चेतावनी है। आइए, हम सब मिलकर सड़कों को सुरक्षित बनाने का संकल्प लें ताकि कोई और मासूम इस तरह की लापरवाही का शिकार न बने।









